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Columba’s School (दिल्ली) में कक्षा 10 के छात्र Shourya Patil द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट

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उन्होंने लिखा:

“Sorry mummy, आपने मुझे इतने बार माफ किया, अब आख़िरी बार दिल तोड़ूंगा।”

भाई को लिखा:

“Sorry भैया, मैंने आपके साथ गाली-बहस की, आपसे अनादर किया।”

पिता को लिखा:

“Sorry papa, मैं आपके जैसा अच्छा इंसान नहीं बन पाया।”

उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा के रूप में कहा:

“मेरी आखिरी चाहत है कि इस पर (शिक्षकों पर) कार्रवाई हो — मैं नहीं चाहता कि कोई और बच्चा मेरी तरह कुछ करे।”

और लिखा कि अगर उनका शरीर या कोई अंग काम कर सके तो कृपया उसे किसी ज़रूरतमंद को दान कर दें।

यह नोट बेहद संवेदनशील है और इसमें छात्र की गहरी भावनात्मक पीड़ा साफ़ दिखाई देती है।

1. छात्र गहरे अपराधबोध में था

“Sorry mummy… Sorry papa… Sorry bhaiya…”
– यह दर्शाता है कि वह खुद को बोझ समझने लगा था।
– बच्चों में ऐसा अपराधबोध अक्सर मनोरोगीय तनाव और लगातार दबाव के कारण आता है।

2. उसे लगातार अपमान और मानसिक दबाव महसूस हुआ

अंतिम इच्छा में उसने लिखा —
“…ऐसी कार्रवाई हो ताकि कोई और बच्चा ऐसा कदम न उठाए।”
– इसका मतलब यह है कि वह खुद को अकेला, असहाय और अनसुना महसूस कर रहा था।

3. उसे सुरक्षित-सहारा देने वाली व्यवस्था नहीं मिली

सुसाइड नोट से दिखता है कि

  • उसे बात करने के लिए जगह नहीं मिली,
  • स्कूल में मदद पाने की कोशिशों के बावजूद राहत नहीं मिली।

यह उन सभी संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण संकेत है जहां बच्चे पढ़ते हैं।

ऐसे नोट से समाज के लिए सुझाव / सीख

1. स्कूलों के लिए – “Zero Tolerance Mental Harassment Policy”

  • मानसिक प्रताड़ना भी शारीरिक हिंसा जितनी गंभीर है।
  • छात्रों को अपमानित करना, डराना, धमकाना — यह अपराध की श्रेणी में माना जाना चाहिए।

2. हर स्कूल में काउंसलर का सक्रिय काम होना अनिवार्य

  • सिर्फ काउंसलिंग रूम होना काफी नहीं है —
    छात्रों को महसूस कराना ज़रूरी है कि वे वहाँ जाकर सुरक्षित हैं।

3. बच्चों की बातें “ड्रामा” या “बहाना” न समझना

अक्सर बच्चे जो कहते हैं, वह हल्का नहीं होता।
उनके भावनात्मक संकेत समय पर पकड़ने चाहिए।

4. परिवारों के लिए — लगातार संवाद बहुत जरूरी

  • रोज़ 5–10 मिनट भी यदि बच्चा बिना जजमेंट के बात करता है, तो वह ऐसे कदम से बच सकता है।

5. यदि कोई बच्चा कहे कि वह “थका हुआ है”, “अकेला लग रहा है”, “जीने का मन नहीं है” — इसे कभी हल्का न लें

यह तुरंत मानसिक स्वास्थ्य सहायता की ज़रूरत का संकेत है।


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