केरल में भगवान अयप्पा के एक भक्ति गीत के “पैरोडी” (व्यंग्यपूर्ण संस्करण) को लेकर उपजा विवाद वर्तमान में काफी गहरा गया है। तिरुवाभरण पाथ संरक्षण समिति (Thiruvabharana Patha Samrakshana Samithi) ने इस मामले में कड़ी आपत्ति जताते हुए आपराधिक जांच की मांग की है।
यहाँ इस पूरे विवाद का विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. विवाद की मुख्य वजह
हाल ही में केरल में हुए स्थानीय निकाय चुनावों (Local Body Elections) के दौरान एक गाना सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसका शीर्षक ‘Pottiye Kettiye’ (पोतिये केतिये) है। यह गाना भगवान अयप्पा के प्रसिद्ध भक्ति गीत ‘पल्लिकेट्टू सबरीमलैक्कू’ (Pallikettu Sabarimalakku) की धुन पर आधारित है।
- गाने की सामग्री: इस पैरोडी में सबरीमाला मंदिर के सोने की चोरी (Gold Heist) के मामले का जिक्र किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के कार्यकर्ताओं ने मंदिर से सोना चुराया।
- विरोध का कारण: समिति का आरोप है कि एक पवित्र भक्ति गीत की धुन का राजनीतिक आरोपों के लिए इस्तेमाल करना करोड़ों भक्तों की आस्था का अपमान है।
2. तिरुवाभरण पाथ संरक्षण समिति की मांग
यह समिति सबरीमाला मंदिर की परंपराओं और भगवान अयप्पा के आभूषणों (Thiruvabharanam) के पवित्र मार्ग की सुरक्षा का कार्य करती है।
- अपराधिक जांच: समिति ने केरल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को शिकायत सौंपी है। उन्होंने मांग की है कि इस गाने के लेखकों, गायकों और इसे सोशल मीडिया पर फैलाने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
- प्रतिबंध की मांग: समिति ने सरकार से इस गाने को सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाने का अनुरोध किया है।
3. पुलिस की कार्रवाई (FIR)
शिकायत के बाद, तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है।
- लेखक जी.पी. कुंज अब्दुल्ला (जो कतर में रहते हैं), गायक दानिश मल्लापुरम और गाने के निर्माताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
- पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या इस गाने के जरिए सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने की कोशिश की गई है।
4. राजनीतिक प्रतिक्रियाएं (पक्ष और विपक्ष)
यह मुद्दा अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है:
- सत्तारूढ़ CPM: पार्टी ने गाने की निंदा की है और इसे विपक्षी दल कांग्रेस (UDF) की “ध्रुवीकरण की राजनीति” करार दिया है।
- विपक्ष (UDF/Congress): विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह कलात्मक स्वतंत्रता पर हमला है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सालों पहले खुद CPM ने इसी धुन पर तत्कालीन मुख्यमंत्री के. करुणाकरण का मजाक उड़ाते हुए पैरोडी बनाई थी।
5. वर्तमान स्थिति
गाने के निर्माताओं ने फिलहाल इस विवाद को देखते हुए गाने को सार्वजनिक रूप से गाने या प्रमोट करने से परहेज करने का फैसला किया है, हालांकि उनका दावा है कि उन्होंने भगवान का अपमान नहीं किया बल्कि केवल एक “भ्रष्टाचार के मामले” को उजागर किया है।
निष्कर्ष: यह मामला केरल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक भावनाओं के बीच की बहस को फिर से गरमा रहा है।
इस मामले में शामिल कानूनी धाराओं और सबरीमाला स्वर्ण विवाद के इतिहास की विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:
1. कानूनी धाराएं: भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्यवाही
केरल पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं का उपयोग किया है जो धार्मिक सद्भाव और सार्वजनिक शांति से संबंधित हैं:
- BNS धारा 299 (पुरानी IPC 295A): यह धारा किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से ठेस पहुँचाने के कृत्य पर लागू होती है। यदि कोई बोलकर, लिखकर या संकेतों द्वारा किसी धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करता है, तो इस धारा के तहत 3 साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है।
- BNS धारा 196 (पुरानी IPC 153A): यह विभिन्न समूहों (धर्म, जाति या जन्म स्थान के आधार पर) के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने के लिए लगाई जाती है। पैरोडी गाने के मामले में आरोप है कि इससे समाज में धार्मिक तनाव पैदा हो सकता है।
- BNS धारा 353 (पुरानी IPC 505): सार्वजनिक शरारत (Public Mischief) करने वाले बयानों या सामग्री के लिए।
2. सबरीमाला स्वर्ण चोरी (Gold Theft) विवाद का इतिहास
जिस विवादित गाने का जिक्र किया जा रहा है, वह सबरीमाला मंदिर के आभूषणों और सोने से जुड़े पुराने और नए विवादों पर आधारित है। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- सोने की कमी का मामला (2019-2021): कुछ साल पहले यह आरोप लगा था कि मंदिर के तिरुवाभरणम (Thiruvabharanam) यानी भगवान को पहनाए जाने वाले पुश्तैनी आभूषणों के वजन में कमी आई है।
- विजिलेंस जांच: त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के रिकॉर्ड और वास्तविक सोने के वजन में अंतर पाए जाने के बाद केरल उच्च न्यायालय ने इस पर कड़ी टिप्पणी की थी। इसके बाद एक विशेष ‘ऑडिट’ और विजिलेंस जांच के आदेश दिए गए थे।
- CPM पर आरोप: विपक्षी दलों और कुछ हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी (CPM) के प्रभाव वाले बोर्ड के तहत सोने के प्रबंधन में भ्रष्टाचार हुआ है। हालांकि, सरकार और बोर्ड ने हमेशा इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
- आभूषणों की सुरक्षा: वर्तमान में, इन आभूषणों की सुरक्षा का जिम्मा ‘पंडलम शाही परिवार’ और देवस्वोम बोर्ड के बीच एक कड़े कानूनी ढांचे के तहत है।
3. पैरोडी और राजनीति का पुराना इतिहास
दिलचस्प बात यह है कि केरल की राजनीति में ‘पल्लिकेट्टू’ (Pallikettu) गाने की धुन का इस्तेमाल पहली बार नहीं हुआ है:
- 1980 के दशक का उदाहरण: कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन के अनुसार, 1980 के दशक में जब के. करुणाकरण मुख्यमंत्री थे, तब कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के सांस्कृतिक संगठनों ने इसी धुन पर उनके खिलाफ पैरोडी गाने बनाए थे।
- विपक्ष का तर्क: विपक्ष का कहना है कि जब CPM ने इसका इस्तेमाल किया तो वह ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ थी, लेकिन अब जब उनके खिलाफ इसका इस्तेमाल हो रहा है, तो इसे ‘धार्मिक अपमान’ बताया जा रहा है।
वर्तमान स्थिति और प्रभाव
अदालत इस समय इस बात की जांच कर रही है कि क्या गाने का उद्देश्य केवल “भ्रष्टाचार पर कटाक्ष” था या फिर जानबूझकर “अयप्पा भक्तों की आस्था” का मजाक उड़ाना। साइबर पुलिस ने यूट्यूब और फेसबुक को इस गाने के लिंक हटाने के लिए नोटिस जारी कर दिया है।


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