
1. विस्फोट की घटना और इतिहास
- विस्फोट का समय: यह ज्वालामुखी रविवार, 23 नवंबर, 2025 को फटा।
- ऐतिहासिक घटना: वैज्ञानिकों के अनुसार, इथियोपिया के अफार क्षेत्र में स्थित यह ‘शील्ड-टाइप’ ज्वालामुखी लगभग 10,000 से 12,000 वर्षों की लंबी निष्क्रियता के बाद फिर से सक्रिय हुआ है (होलोसीन काल में इसका कोई ज्ञात विस्फोट रिकॉर्ड नहीं था)।
- राख की ऊंचाई: विस्फोट इतना जोरदार था कि राख और सल्फर डाइऑक्साइड गैसों का विशालकाय गुबार 14 से 15 किलोमीटर (करीब 45,000 फीट) की ऊंचाई तक पहुंच गया।

2. राख के बादल का फैलाव और भारत पर असर
- फैलाव का रास्ता: ऊपरी वायुमंडल में मौजूद जेट स्ट्रीम हवाओं के कारण राख का बादल 100-120 किमी/घंटा की गति से लगभग 4,000 से 4,500 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए लाल सागर के पार यमन, ओमान और फिर अरब सागर होते हुए पश्चिमी और उत्तरी भारत की ओर बढ़ा।
- भारत में प्रवेश: राख का गुबार सोमवार रात (करीब 11 बजे) और मंगलवार सुबह तक गुजरात, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा के आसमान में देखा गया।
- वर्तमान स्थिति (मंगलवार): भारतीय मौसम विभाग (IMD) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया है कि राख का गुबार अब चीन की ओर बढ़ रहा है। इसके मंगलवार शाम 7:30 बजे (स्थानीय समयानुसार) तक भारतीय आसमान से पूरी तरह बाहर निकल जाने की उम्मीद है।

3. विमानन और उड़ानों पर प्रभाव
- डीजीसीए एडवाइजरी: नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने सभी भारतीय एयरलाइंस को राख से प्रभावित क्षेत्रों और उड़ान स्तरों से सख्ती से बचने की सलाह दी है।
- उड़ानें प्रभावित: राख के बादलों के कारण हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, क्योंकि ज्वालामुखी की राख विमान के इंजन, विंडशील्ड और सेंसर सिस्टम के लिए खतरनाक होती है।
- कई उड़ानें रद्द/विलंबित: अकासा एयर, इंडिगो और एयर इंडिया सहित कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों ने जेद्दा, कुवैत, अबू धाबी और कुछ घरेलू रूटों पर अपनी उड़ानें रद्द की हैं या उनके मार्ग बदले हैं। मुंबई हवाई यातायात नियंत्रण से गुजरने वाली कम से कम 28 उड़ानों के मार्ग बदले गए।
- दिल्ली-एम्स्टर्डम की KLM रॉयल डच एयरलाइंस की एक उड़ान भी रद्द हुई।

4. वायु गुणवत्ता (AQI) और स्वास्थ्य पर असर
- IMD का मत: IMD और मौसम विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि राख के बादल 15,000 से 45,000 फीट की बहुत अधिक ऊंचाई पर हैं। इसलिए, इसका सीधा और महत्वपूर्ण असर जमीन पर मौजूद दिल्ली-एनसीआर के AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) पर पड़ने की संभावना कम है।
- राख की संरचना: राख में मुख्य रूप से सिलिका, चट्टानी कण और सल्फर डाइऑक्साइड गैस शामिल है।
- स्वास्थ्य सलाह: विशेषज्ञों ने अस्थमा या सीओपीडी जैसी सांस की बीमारियों वाले संवेदनशील लोगों को तराई और पहाड़ी क्षेत्रों में एहतियात बरतने की सलाह दी है, हालांकि मैदानी इलाकों में सतह पर राख गिरने (ऐशफॉल) की संभावना बहुत कम है।


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